भागीरथपुरा हादसे के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

इंडिया रिपोर्टर लाइव
इंदौर, 27 जुलाई 2026। इंदौर में भागीरथपुरा त्रासदी के बाद सरकार ने जल सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुए दर्दनाक हादसे में 35 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद की गई विस्तृत जांच में प्रशासन और सरकार ने इस घटना को दूषित पानी से फैलने वाली महामारी का गंभीर संकेत माना है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में राज्य के सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान को संशोधित किया है। इसी योजना के तहत पानी की गुणवत्ता की लगातार जांच करने के लिए इंदौर जिले में एक विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है। इसके साथ ही जिले में मौजूद सभी जल स्रोतों का एक विस्तृत हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा और जल स्रोतों की जियो टैगिंग भी की जाएगी ताकि उनकी सटीक स्थिति दर्ज रहे।
पानी को हर तरह के प्रदूषण से सुरक्षित रखने और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए नौ प्रमुख बिंदुओं पर आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है। इस नई योजना में सतही पानी, ग्राउंड वॉटर यानी भूजल और पारंपारिक जल स्रोतों जैसे कुएं और बावड़ी के संरक्षण के साथ-साथ दूषित पानी के सही उपचार पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इंदौर में बनी वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल जिले की नदियों, तालाबों और अन्य सभी स्रोतों की नियमित निगरानी रखेगी। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार पूरे जिले में स्वच्छ जल आपूर्ति और जल संरक्षण के लिए यह नई योजना तैयार की गई है। भागीरथपुरा में हुए जल जनित हादसे को लेकर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इस जांच रिपोर्ट को इंदौर के नए एनवायरनमेंट प्लान में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भागीरथपुरा की घटना पूरी तरह से एक जल जनित आउटब्रेक थी। लैब जांच के दौरान पानी के नमूनों में खतरनाक ई कोलाई बैक्टीरिया और अन्य दूषित तत्व पाए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सभी जिलों से उनके क्षेत्र के जल स्रोतों में सीवरेज का गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।
प्रशासन द्वारा जिले में कई महत्वपूर्ण और बड़े बदलाव लागू किए जा रहे हैं। सबसे पहले जिले की सभी नदियों, तालाबों और उनके लगातार प्रदूषित हो रहे संवेदनशील हिस्सों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद तय मानकों और गुणवत्ता के आधार पर सभी जल स्रोतों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा। यह महत्वपूर्ण काम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम की अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर पूरा करेंगी। शहर में दूषित पानी के हॉट स्पॉट का चयन किया जाएगा। वर्तमान में कान्ह और सरस्वती नदी के किनारे ऐसे कई हॉट स्पॉट मौजूद हैं जहां गंदा पानी मिल रहा है। हालांकि नदी के पानी की ऑनलाइन निगरानी पहले से की जा रही है, लेकिन अब इन चिन्हित स्थानों पर सुधार कार्य तेजी से किए जाएंगे। इसके अलावा नदी और तालाबों को कचरा फेंकने और अवैध अतिक्रमण से पूरी तरह बचाया जाएगा। भूजल स्रोतों की अनिवार्य रूप से जियो टैगिंग की जाएगी और जिले में वॉटर हार्वेस्टिंग व वॉटर रिचार्जिंग की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। आम जनता के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का ईवीएन अलर्ट ऐप और ऑनलाइन सिस्टम चालू किया गया है ताकि दूषित पानी से जुड़ी किसी भी शिकायत का तुरंत निवारण किया जा सके।


