अंकित हत्याकांड: कोड वर्ड में हत्या की साजिश

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

मेरठ/शामली, 01 सितंबर 2026। शामली में अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में पुलिस के अनुसार शूटर कोड वर्ड के जरिए संपर्क में थे। ‘भोलू’, ‘किथ सै’ और ‘के हाल है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और स्नेपचैट से निर्देश मिलने का दावा है।

शामली के हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में पुलिस के सामने साजिश से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार शूटर आपस में सीधे नाम लेकर बात नहीं करते थे, बल्कि ‘भोलू’, ‘किथ सै’ और ‘के हाल है’ जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि स्नेपचैट के माध्यम से विदेश में बैठे और गिरोह से जुड़े लोगों ने शूटरों से संपर्क बनाए रखा और उन्हें निर्देश दिए।

कोड वर्ड से होती थी शूटरों के बीच बातचीत
पुलिस के अनुसार नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले कोड वर्ड के अलग-अलग अर्थ तय थे। ‘भोलू’ का इस्तेमाल निकलने के संकेत के तौर पर किया जाता था, जबकि ‘किथ सै’ का मतलब अपने आदमी होने की पुष्टि से जुड़ा था। वहीं ‘के हाल है’ बातचीत खत्म करने के संकेत के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब इन कोड वर्ड से जुड़े मोबाइल डाटा और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है।

शूटरों के मोबाइल से मिले सुराग
मुठभेड़ में मारे गए शूटरों के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच में पुलिस को नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार सोनीपत के सुमित और मोहित तथा करनाल के सत्यम और आर्यन अलग-अलग स्थानों से शामली पहुंचे थे।

20 अगस्त को रेकी के लिए भेजे गए थे सुमित-मोहित
पुलिस के अनुसार सुमित और मोहित को 20 अगस्त को अंकित की रेकी के लिए शामली भेजा गया था। दोनों दिल्ली रोड स्थित एक होटल में रुके और अंकित की गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद करनाल के सत्यम और आर्यन भी इस नेटवर्क से जुड़े।

वारदात वाले दिन खाली प्लॉट के पास मिले चारों
पुलिस की जांच के मुताबिक घटना वाले दिन चारों शूटर नाला पटरी के पास एक खाली प्लॉट के नजदीक मिले थे। इन्हें आपस में जोड़ने और आगे के निर्देश देने का काम सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया।

विदेश में बैठे लोगों से संपर्क का दावा
पुलिस के अनुसार इस साजिश में गिरोह से जुड़े कुछ लोग विदेश से भी स्नेपचैट के जरिए शूटरों के संपर्क में थे। पुलिस मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

डिजिटल साक्ष्यों से साजिश की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
अंकित हत्याकांड की जांच में पुलिस अब मोबाइल डाटा, सोशल मीडिया चैट और शूटरों की आवाजाही से जुड़े साक्ष्यों को जोड़ रही है। पुलिस का दावा है कि इन डिजिटल सुरागों से हत्या की योजना बनाने वाले लोगों और शूटरों के बीच संपर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। 

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