मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को दी मंजूरी ,मानव संसाधन मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा

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स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए: प्रकाश जावड़ेकर

नई शिक्षा नीति के तहत यूनिवर्सिटीज और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम

इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 29 जुलाई 2020 केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। अब ह्यूमन रिसोर्स मिनिस्ट्री यानी मानव संसाधन मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद एचआरडी मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने नई शिक्षा नीति के बार में विस्तार से बताया।

मानव संसाधन मंत्रालय फिर से हुआ शिक्षा मंत्रालय

मानव संसाधन मंत्रालय को अब फिर से शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। शुरुआत में इस मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही था लेकिन 1985 में इसे बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय नाम दिया गया था। नई शिक्षा नीति के मसौदे में इसे फिर से शिक्षा मंत्रालय नाम देने का सुझाव दिया गया था।

नई शिक्षा नीति के प्रमुख बातें –

भारत ज्ञान की महाशक्ति बनकर उभरेगा: निशंक

जावड़ेकर ने नई शिक्षा नीति को ऐतिहासिक बताया। वहीं, रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति के बाद भारत ज्ञान की महाशक्ति बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों से लेकर जन प्रतिनिधियों तक से गहन चर्चा, परामर्श के बाद इसे तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि सवा 2 लाख सुझाव आए थे। उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई थी।

इसरो के पूर्व चीफ कस्तूरीरंग की अगुआई वाले पैनल ने तैयार किया मसौदा

नई शिक्षा नीति के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चीफ के. कस्तूरीरंगन की अगुआई में एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने पिछले साल एचआरडी मिनिस्ट्री में नई शिक्षा नीति के मसौदे को पेश किया था। बाद में उस मसौदे को तमाम हितधारकों के सुझावों के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया। मंत्रालय को इसके लिए करीब सवा 2 लाख सुझाव आए थे।

मौजूदा शिक्षा नीति 1986 में आई थी

देश की मौजूदा शिक्षा नीति को 1986 में तैयार किया गया था। 1992 में उसमें सुधार किया गया था। बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही नई शिक्षा नीति को अपने चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा बनाया था।

नई शिक्षा नीति की कुछ खास बातें

  • नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल कोर्सेज को खत्म किया जा रहा है
  • लीगल और मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का संचालन सिंगल रेग्युलेटर के जरिए होगा
  • पांचवी तक पढ़ाई के लिए होम लैंग्वेज, मातृ भाषा या स्थानीय भाषा माध्यम
  • यूनिवर्सिटीज और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एन्ट्रेंस एग्जाम होंगे
  • छठी कक्षा के बाद से ही वोकेशनल एजुकेशन की शुरुआत
  • सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक तरह के मानदंड होंगे
  • बोर्ड एग्जाम रटने पर नहीं बल्कि ज्ञान के इस्तेमाल पर अधारित होंगे

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