
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 08 अगस्त 2025। केंद्र सरकार ने अंग प्रत्यारोपण को लेकर देश में नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों की प्रतीक्षा सूची में महिलाओं और अंगदान करने वाले या उनके परिजनों को विशेष अंक यानी उन्हें मृत दाता से मिलने वाले अंगों में वरीयता दी जाएगी। इतना ही नहीं, केंद्र ने इस आदेश पर प्रत्येक राज्य से एक्शन रिपोर्ट भी दाखिल करने का आदेश दिया है। राज्यों को जारी आदेश में केंद्र सरकार ने कहा है कि अंगदान को बढ़ावा देने पर प्रत्येक राज्य को जोर देना चाहिए। जो परिवार या सदस्य अंगदान कर रहे हैं, उनके परिजनों को 15 अगस्त, 26 जनवरी या फिर राज्य स्थापना जैसे सार्वजनिक समारोहों में सम्मानित किया जाएगा। आदेश में साफ तौर पर कहा है कि दिवंगत अंगदाताओं को पूरा सम्मान देने और उनका गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इसलिए मृतक दाता के परिवार को राज्य या जिला स्तर पर होने वाले सार्वजनिक समारोह में सम्मानित किया जाए।
2024 में 19,000 अंग प्रत्यारोपण
दरअसल भारत में हर साल अंग प्रत्यारोपण के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। हाल में, राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) ने वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि पहली बार भारत ने एक साल में 19 हजार अंग प्रत्यारोपण किए हैं। इसका मतलब है कि साल 2024 में हर घंटे कम से कम दो मरीजों को देश के अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण हुआ है। सबसे ज्यादा अंग प्रत्यारोपण के मामले में भारत अब दुनिया का तीसरा देश बन गया। वहीं, जीवित दाता अंग प्रत्यारोपण के मामले में भारत पहले स्थान पर है।
लैंगिक असमानता को दूर करना जरूरी
नोटो के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए नई व्यवस्थाओं के तहत राज्यों को निर्देश दिए गए। इसमें से प्रत्यारोपण को लेकर लैंगिक असामनता को दूर करना है क्योंकि भारत में सबसे ज्यादा जीवित दाताओं के जरिए प्रत्यारोपण हो रहे हैं और उनमें महिला और पुरुषों के बीच अंतर है। इसलिए मृत अंग दान की प्रतीक्षा सूची में महिलाओं को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान किया गया है।
जल्द बनेंगे ट्रॉमा सेंटर अंग प्राप्ति केंद्र
राज्यों को जारी आदेश में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंगदान को बढ़ावा मिलने के साथ साथ अंगों की समय रहते प्राप्ति करना भी बहुत जरूरी है। देश भर में लगभग एक हजार से अधिक ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित हैं जिनमें से अधिकांश के पास मृतक दाताओं से अंग प्राप्त करने की सुविधा नहीं है। इसलिए राज्यों से कहा है कि तत्काल सभी ट्रॉमा सेंटर में अंग एवं ऊतक प्राप्ति की व्यवस्था विकसित की जाए। आपातकालीन कर्मियों और एम्बुलेंस स्टाफ को सड़क दुर्घटना या फिर स्ट्रोक से पीड़ित संभावित दाताओं की पहचान तथा अस्पताल के अंग दान समन्वयक को समय पर सूचित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।


