14,000 फीट पर भारतीय सैनिकों को मिल रहा नया युद्ध कौशल, अब हर सैनिक स्वयं में होगा एक ‘हथियार’

Indiareporter Live
शेयर करे

इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 26 नवंबर 2025। भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले उत्तर-पूर्व के संवेदनशील इलाकों में एएमएआर यानी आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन का विशेष प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। कड़ाके की ठंड, बर्फानी हवाओं और बेहद कठिन पर्वतीय भू-भाग में चल रहा यह प्रशिक्षण सेना की पर्वतीय युद्धक क्षमता को और मजबूत बना रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य सैनिकों को उन स्थितियों के लिए तैयार करना है, जहां पारंपरिक हथियार तुरंत उपलब्ध न हों और निर्णय सेकंडों में लेना पड़े।

गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत के अनुसार, एएमएआर भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं और आधुनिक क्लोज-कॉम्बैट तकनीकों का एक संयुक्त रूप है। यह प्रणाली भारतीय सेना ने अपने अनुभव और आवश्यकताओं के आधार पर विकसित की है। एएमएआर में खाली हाथ मुकाबला, हथियारों के साथ नजदीकी लड़ाई, तनाव में प्रतिक्रिया क्षमता, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक सहनशक्ति पर फोकस किया जाता है। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए बनाया गया है जहां समय, भू-भाग और मौसम तेजी से बदलते हैं।

ऊंचाई पर युद्ध क्षमता को बढ़ाता प्रशिक्षण
14,000 फीट की ऊंचाई पर हवा पतली होती है और तापमान शून्य से काफी नीचे। सैनिकों के लिए यह प्रशिक्षण सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाता है। इसी कारण एएमएआर को पर्वतीय इलाकों के लिए “फोर्स मल्टीप्लायर” माना जाता है। यह सैनिकों की रिफ्लेक्स क्षमता, संतुलन, स्टैमिना और उच्च-स्तरीय सतर्कता विकसित करता है, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नजदीकी युद्ध के दौरान निर्णायक भूमिका निभाती है।

दबाव में शांत रहने की कला सिखाता है एएमएआर
प्रशिक्षण में शामिल एक युवा अधिकारी ने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहाड़ हर पल आपकी सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की परीक्षा लेते हैं। उन्होंने बताया कि एएमएआर उन्हें दबाव में भी शांत रहने की कला सिखाता है। अधिकारी के अनुसार, “यह प्रशिक्षण भरोसा देता है कि बिना हथियार के भी हम किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम हैं।” यह क्षमता सैनिकों को अचानक होने वाली झड़पों और नजदीकी मुकाबलों में त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

हर सैनिक बनता है ‘स्वयं एक हथियार’
ले. कर्नल रावत के अनुसार, एएमएआर सैनिकों को हर समय और हर जगह लड़ने योग्य बनाता है। यह सिर्फ एक मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि एक संपूर्ण युद्ध दर्शन है, जिसमें मन, शरीर और प्रतिक्रिया क्षमता का मेल होता है। कठिन हालात में बिना हथियार लड़ने की यह तकनीक सैनिकों को किसी भी खतरे के सामने खड़े होने की क्षमता प्रदान करती है। सेना का मानना है कि एएमएआर भविष्य के युद्धों में एक निर्णायक कौशल साबित होगा।

पर्वतीय युद्धक क्षमता को मिलेगी नई मजबूती
उत्तरी सीमाओं पर बढ़ती संवेदनशीलता और दुर्गम भू-भाग को देखते हुए एएमएआर प्रशिक्षण सेना की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह प्रशिक्षण पर्वतीय मोर्चों पर तैनात सैनिकों को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार करता है। सेना को विश्वास है कि एएमएआर आने वाले वर्षों में पर्वतीय युद्ध की परिस्थितियों में एक गेम-चेंजर साबित होगा और भारतीय सैनिकों को अतिरिक्त बढ़त प्रदान करेगा।

Leave a Reply

Next Post

चीन में उत्पीड़न विवाद: अरुणाचल की महिला ने दिया भारतीयों में एकता का संदेश, ट्रोल्स पर साधा निशाना

शेयर करे इंडिया रिपोर्टर लाइव नई दिल्ली 26 नवंबर 2025। चीन में उत्पीड़न का सामना करने वाली अरुणाचल प्रदेश की महिला ने शंघाई हवाई अड्डे की घटना के बाद ट्रोल्स पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जो भी कदम उठाती है, वह केवल मेरे हित में नहीं, सभी […]

You May Like

छत्तीसगढ़ में निकली एएनएम, स्टाफ नर्स समेत कई पदों पर भर्ती....|....गौधाम योजना निकली हवाहवाई पशुधन सड़कों पर भटक रहे, दुर्घटना हो रहा....|....लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने पर टिकीं मीराबाई चानू की निगाहें....|....अडवार नदी का रपटा डूबा, नदी-नाले उफान पर....|....संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में शुल्क वृद्धि पर युवा कांग्रेस का आंदोलन....|....पूर्व क्रिकेटर पर 17.52 लाख की धोखाधड़ी का आरोप....|....रोपा लगाने जा रही महिलाओं से भरा ट्रैक्टर पलटा, दो की मौत; छह घायल....|....मानसून की बारिश में हीराकुंड डैम लबालब....|....वर्षा प्रभावितों के लिए उचित मुआवजा की घोषणा करें सरकार- त्रिलोक चंद्र श्रीवास....|....कोल इंडिया के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान के तहत एसईसीएल ने बिलासपुर में एक ही दिन में 15 हजार पौधों का वृहद् पौधरोपण