
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 16 दिसंबर 2025। जय दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना ने अपनी आधुनिक और स्वदेशी ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आर्मी हाउस में आयोजित ‘एट होम’ कार्यक्रम में शिरकत की, जहां सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर भारतीय सेना ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, ड्रोन विश्लेषण तकनीक, पोर्टेबल कम्युनिकेशन सिस्टम और आधुनिक उपकरणों की झलक पेश की। यह प्रदर्शन सेना के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ते कदम को दिखाता है।
दिसंबर 16 को मनाए जाने वाले विजय दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में सेना ने बताया कि कैसे भारतीय सैनिक, इंजीनियर, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थान मिलकर देश की सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रदर्शन भारतीय सेना के आधुनिक, नवाचार आधारित और आत्मनिर्भर स्वरूप को दर्शाता है। कार्यक्रम में 73 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त, वीरता पुरस्कार विजेता, खिलाड़ी और देश के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इससे दुनिया के सामने भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा भी साफ नजर आया।
एआई आधारित सिस्टम बना आकर्षण का केंद्र
इस कार्यक्रम में सबसे बड़ा आकर्षण एआई आधारित सैटेलाइट इमेजरी विश्लेषण प्रणाली रही। यह सिस्टम सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों का तेजी से और सटीक विश्लेषण करता है। पहले जहां तस्वीरों को हाथ से देखकर समझना पड़ता था, वहीं अब यह तकनीक बदलाव पहचानने, गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरी जानकारी तुरंत सामने लाने में मदद करती है। यह सिस्टम सेना की तैयारियों को मजबूत करता है और आपदा प्रबंधन, कृषि आकलन, भूमि प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की योजना में भी नागरिक एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
नेटवर्क के बिना भी काम करने वाली एआई तकनीक
भारतीय सेना ने एक खास पोर्टेबल एआई सिस्टम भी दिखाया, जिसे ‘एआई-इन-ए-बॉक्स’ कहा जा रहा है। यह सिस्टम बिना इंटरनेट या नेटवर्क के भी काम करता है। दूरदराज और कठिन इलाकों में यह तकनीक सैनिकों को जानकारी का विश्लेषण करने, योजना बनाने और फैसले लेने में मदद देती है। इसके साथ ही सेना ने ‘एकम एआई’ प्लेटफॉर्म भी पेश किया, जो पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित है। यह संवेदनशील इलाकों में विदेशी सॉफ्टवेयर या बाहरी क्लाउड पर निर्भरता के बिना काम करता है।
ड्रोन और संचार प्रणाली पर खास जोर
सेना ने स्वदेशी ड्रोन विश्लेषण प्रणाली का भी प्रदर्शन किया। यह सिस्टम बरामद किए गए ड्रोन की जांच कर उनसे अहम जानकारी निकालता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि ड्रोन का इस्तेमाल कैसे किया गया और भविष्य के खतरों से कैसे निपटा जाए। इसके अलावा प्रोजेक्ट संभव के तहत एक पोर्टेबल सैटेलाइट आधारित संचार प्रणाली भी दिखाई गई, जो आपदा या दूरस्थ इलाकों में जल्दी तैनात की जा सकती है। इससे सैनिकों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी संचार व्यवस्था बेहतर होती है।
आपदा और युद्ध दोनों में काम आने वाले उपकरण
कार्यक्रम में सेना ने एक उन्नत ट्रस ब्रिज भी प्रदर्शित किया, जिसे कम समय और कम लोगों की मदद से खड़ा किया जा सकता है। यह पुल भारी वाहनों का भार सहन कर सकता है और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी है। इसके साथ ही एक मानवरहित फायरफाइटिंग रोबोट भी दिखाया गया, जो खतरनाक आग वाले इलाकों में इंसानों की जगह काम कर सकता है। यह रोबोट कैमरे और सेंसर की मदद से दूर से नियंत्रित होता है और रक्षा ठिकानों, औद्योगिक क्षेत्रों व आपदा के समय जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
आत्मनिर्भर सेना की मजबूत तस्वीर
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह पूरा प्रदर्शन भारतीय सेना के निरंतर बदलाव को दर्शाता है, जो भारतीय सोच, भारतीय उद्योग और भारतीय मूल्यों पर आधारित है। सेना अपने अनुभव को नवाचार से जोड़कर न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि आपदा प्रबंधन, सतत विकास और आत्मनिर्भरता में भी अहम योगदान दे रही है। विजय दिवस की पूर्व संध्या पर यह प्रदर्शन भारत की सैन्य शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश देता है।


