
इंडिया रिपोर्टर लाइव
मुंबई 30 दिसंबर 2025। महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनावों को लेकर भाजपा ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के बच्चों या पत्नियों को चुनावी टिकट न देने का निर्णय लिया है। भाजपा नेतृत्व के इस कदम का उद्देश्य पार्टी के भीतर परिवारवाद को खत्म कर जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना है। राज्यसभा सांसद धनंजय महादिक ने सोमवार को बताया कि हाल में वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुई बैठकों में यह निर्णय लिया गया। पार्टी अब किसी नेता के करीबी रिश्तेदार को उम्मीदवार नहीं बनाएगी। महादिक के अनुसार हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं। इस आदेश का पूरी तरह पालन करेंगे। पार्टी के इस सख्त रुख का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
कई नामाकंन हुए वापस
महादिक के अनुसार, भाजपा ने 15 जनवरी को होने वाले 29 नगर निगमों के चुनावों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है, लेकिन सूची में किसी भी मौजूदा सांसद, विधायक या मंत्री के बेटे-बेटियों के नाम शामिल नहीं हैं। जहां-जहां पहले सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के रिश्तेदारों ने नामांकन दाखिल किया था, वहां पार्टी के निर्देश के बाद नामांकन वापस ले लिए गए हैं।
नासिक में भाजपा विधायक सीमा हिरे और देवयानी फरांडे के बेटों ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। धनंजय महादिक के बेटे ने भी अपना नाम चुनावी दौड़ से बाहर कर लिया है। पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और अन्य इलाकों से 100 से अधिक नेताओं ने अपने परिजनों के लिए टिकट मांगे थे। सूत्रों का कहना है कि पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में परिवारवाद के आरोपों के कारण भाजपा को आलोचना झेलनी पड़ी थी।
धनंजय महादिक के बेटे ने भी नाम वापस लिया
महादिक ने स्वीकार किया कि उनके बेटे ने वरिष्ठ नेताओं की अनुमति लेकर नामांकन दाखिल किया था, लेकिन राज्य स्तर पर फैसला होने के बाद उसने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, जब पार्टी ने तय किया कि नेताओं के परिवारों को टिकट नहीं मिलेगा, तो मेरे बेटे ने भी पीछे हटने का फैसला किया। महादिक ने यह भी माना कि टिकट वितरण को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने कहा, जिन्हें टिकट नहीं मिला, उनमें असंतोष है। हम दो दिनों के भीतर उनसे बात करेंगे और स्थिति को समझाएंगे। महायुति के तालमेल में कुछ को नुकसान हो सकता है, लेकिन हम सबको संतुष्ट करेंगे।
100 से अधिक रिश्तेदारों और परिजनों के लिए मांगे गए थे टिकट
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया है, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों में विधायकों और सांसदों की ओर से अपने परिजनों के लिए टिकट की मांग बढ़ती जा रही थी। अकेले पुणे में ही छह निर्वाचित प्रतिनिधियों ने नौ रिश्तेदारों के लिए टिकट की मांग की गई थी। करीब 100 से अधिक सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के परिजनों के लिए टिकट की मांग की गई थी।


