
इंडिया रिपोर्टर लाइव
मॉस्को 10 मई 2026। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विजय दिवस परेड के बाद एक बड़ा दावा किया है। पुतिन का मानना है कि यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस युद्ध को भड़काने के लिए पश्चिमी देशों के ‘ग्लोबलिस्ट विंग’ वैश्विक अभिजात वर्ग को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। पुतिन के अनुसार, पश्चिमी देशों ने अपने भू-राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए यूक्रेन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि रूस के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और यूक्रेन के हाथों रूसी सेना पर हमला करवाया गया।
पुतिन ने किया इस्तांबुल समझौते का जिक्र
राष्ट्रपति पुतिन ने साल 2022 के इस्तांबुल समझौते की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय यूक्रेन समझौते के लिए तैयार था। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन ने शुरुआती दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे, लेकिन बाद में फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव में आकर कदम पीछे खींच लिए। पुतिन ने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रों और तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने यूक्रेन को यह कहकर रोका कि यह एक अनुचित समझौता है। पुतिन ने सवाल उठाया कि जब यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल खुद तैयार था, तो बाहरी ताकतें इसे अनुचित कैसे कह सकती हैं? उनके अनुसार, पश्चिमी सैन्य सहायता ने ही इस युद्ध को इतना लंबा खींचा है।
रूस को तबाह करने की कोशिशें हुई नाकाम
युद्ध के पांचवें साल में प्रवेश करने पर पुतिन ने सतर्कता भरी आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पश्चिम को उम्मीद थी कि वे कुछ ही महीनों में रूस को कुचल देंगे और उसकी राज्यसत्ता को नष्ट कर देंगे, लेकिन वे इसमें पूरी तरह विफल रहे। अब वे खुद इस दलदल में फंस चुके हैं। पुतिन ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में यूरोप में राजनीतिक बदलाव होंगे और ऐसी शक्तियां सत्ता में आएंगी जो रूस के साथ बेहतर संबंधों को प्राथमिकता देंगी।
पुतिन बोले- भारत, चीन और अमेरिका से चर्चा के बाद बनी युद्धविराम पर सहमति
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘विजय दिवस’ के अवसर पर यह भी कहा कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध की ताजा स्थिति को लेकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों को भरोसे में लिया है। पुतिन ने कहा कि शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इन देशों के साथ रणनीतिक जानकारी साझा की गई है। इस कूटनीतिक पहल के बाद रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिनों के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में मानवीय राहत पहुंचाना और तनाव को कम करना है। पुतिन ने कहा कि नाजीवाद पर ऐतिहासिक जीत के सम्मान में यह कदम उठाना जरूरी था। इसके साथ ही कीव में मौजूद विदेशी दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी भरोसा दिया गया है। भारत और चीन जैसे ‘मित्र देशों’ की इस प्रक्रिया में भागीदारी को पुतिन ने वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि यह युद्धविराम केवल तीन दिनों के लिए है, लेकिन इसे भविष्य में किसी स्थायी शांति समझौते की दिशा में एक बड़ी शुरुआती कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप की मध्यस्थता के बाद तीन दिवसीय युद्धविराम
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिवसीय युद्धविराम की घोषणा की है। यह अस्थायी शांति समझौता रूस के ‘विजय दिवस’ समारोहों के अवसर पर हुआ है। ट्रंप के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की इस संक्षिप्त युद्धविराम के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब भी इस युद्ध के स्थायी समाधान और बातचीत के जरिए शांति बहाली की उम्मीद कर रहा है।


