‘मोदी की गारंटी’ में क्या छत्तीसगढ़ के जंगलों और खनिजों की खुली बोली लगाना भी शामिल था? – कांग्रेस

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

रायपुर, 19 सितंबर 2026। तारा कोल ब्लॉक नीलामी को भाजपा की ‘कॉर्पाेरेट-परस्त-नीति’ का प्रत्यक्ष प्रमाण बताते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सत्ता में आते ही भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। ‘डबल इंजन’ का मतलब अब स्पष्ट हो चुका है-एक इंजन दिल्ली से हुक्म चलाता है और दूसरा इंजन छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों को अपने कॉर्पाेरेट मित्रों की झोली में डालता है। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़िया हितों और आदिवासी समाज की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों को चुनिंदा उद्योगपतियों की तिजोरी भरने के लिए बलि चढ़ाया जा रहा है। स्थानीय पर्यावरण, हसदेव-सरगुजा अंचल के जैव-विविधता संरक्षण और जन-अधिकारों की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। पांचवी अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत प्रदत्त ग्राम सभाओं के अधिकारों को दरकिनार कर कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि क्या राज्य का विकास केवल जंगलों की बलि देकर और आदिवासियों को बेघर करके ही संभव है? तारा कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और जल-जंगल-जमीन सुरक्षा पर रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या यह सत्य नहीं है कि यह फैसला स्थानीय आदिवासियों और पर्यावरण की कीमत पर केवल चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए लिया गया है? ‘मोदी की गारंटी’ में क्या छत्तीसगढ़ के जंगलों और खनिजों की खुली बोली लगाना भी शामिल था? जब कांग्रेस सरकार ने राज्य के संसाधनों और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा था, तो भाजपा आते ही खदानों की लूट क्यों शुरू हो गई? जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा में लगे आदिवासी समाज का जबरिया विस्थापन किया जा रहा है। स्थानीय पर्यावरण का विनाश हो रहा है, जल स्तर में भी तेजी से गिरावट तय है, ऐसे में विस्थापन और पर्यावरण के विनाश का सामना करने वाले स्थानीय परिवारों के लिए सरकार के पास क्या जवाब है? सरगुजा के स्वाभिमान का सौदा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि कांग्रेस सरकार ने हमेशा छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान, आदिवासियों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेपरि रखा तथा जल-जंगल-जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय जनता को दिया। सरकार बदलने के बाद 11 दिसंबर 2025 को साय सरकार ने तारा कोल ब्लॉक को नीलाम करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा, जिसके आधार पर यह खदान अडानी को दे दिया गया, जबकि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित छत्तीसगढ़ के 9 कोल ब्लाको को नीलामी से अलग रखने के लिए पत्र लिखा था। यही नहीं 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर मांग की थी कि हसदेव-अरण्य में अब किसी भी कोल ब्लॉक का आवंटन या नीलामी न की जाए। 16 जुलाई 2023 को कांग्रेस की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट रूप से कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी भी नई खदान के आवंटन या विकास की कोई आवश्यकता नहीं है। 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा सहित 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से वास्तव में डी नोटिफाई कर दिया था। फिर उसके बाद राज्य में सरकार बदलने के बाद फिर से नीलामी कर दिया गया। भाजपा छत्तीसगढ़ की जनता के लिए नहीं अडानी के लिए सरकार चला रही है।

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