
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली, 06 नवंबर 2026। घुटनों में दर्द की समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों की दिक्कत नहीं रह गई है, कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल की गड़बड़ी, शारीरिक गतिविधियों में कमी के साथ अधिक वजन और मोटापा ने इसके खतरे को काफी बढ़ा दिया है। चोट के कारण भी कम उम्र के लोग भी इससे परेशान हो रहे हैं। वैसे तोघुटनों में दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन अगर आपको ये समस्या ऑस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों से जुड़ी कोई दूसरी बीमारी की वजह से है तो परेशानी लंबे समय तक परेशान करती रह सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, घुटनों का काम सिर्फ शरीर का वजन संभालना नहीं है, बल्कि चलने, दौड़ने, उठने-बैठने और सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधियों में भी इनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में लगातार दर्द रहने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
क्या आप भी दर्द से रहते हैं परेशान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, घुटनों में लगातार दर्द रहने से चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है। दर्द से बचने के लिए अक्सर लोग चलते समय अपने शरीर का वजन एक तरफ ज्यादा डालने लगते हैं। इससे चलने का तरीका बदल सकता है। इसके अलावा एक तरफ भार डालने से कूल्हों, जांघों तथा पैरों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों में समय के साथ जोड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
घुटनों के लिए शारीरिक गतिविधियां जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, नियमित शारीरिक गतिविधियां घुटनों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग जैसी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। ये मांसपेशियां घुटने के जोड़ को सहारा देती हैं और उसकी स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
- ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर घुटनों में तेज दर्द या सूजन रहती है तो ज्यादा तीव्रता वाले व्यायाम नहीं करना चाहिए। इससे दर्द और बढ़ सकता है।
- अगर आप नियमित रूप से जिम नहीं जा सकते तो वॉक करना, हल्की साइकिलिंग या डॉक्टर की सलाह से हल्के स्तर के व्यायाम भी कर सकते हैं।
घुटनों को ठीक रखने के लिए इन बातों को भी जान लीजिए
शरीर का बढ़ा हुआ वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे चलने और सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधियों में परेशानी बढ़ सकती है।
- मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक भी है। वजन कंट्रोल रखने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और जोड़ों की सेहत बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
- गलत फिटिंग वाले जूते और लंबे समय तक ऊंची हील पहनने से भी चलने का तरीका प्रभावित हो सकता है। इससे पैरों और घुटनों पर दबाव बढ़ सकता है।
- ऐसे जूते चुनें जो आरामदायक हों, पैरों को पर्याप्त सपोर्ट दें और सही फिटिंग के हों।
- गठिया या घुटनों में दर्द की समस्या वाले लोगों को जूतों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
डॉक्टर कहते हैं, अगर घुटनों में लगातार दर्द, सूजन, लालिमा या चलने में परेशानी बनी रहती तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं। समय पर जांच और सही देखभाल से समस्या को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।


