सड़कों पर कचरे के ढेर, टैंकरों से पानी की सप्लाई भी बंद

इंडिया रिपोर्टर लाइव
भोपाल, 06 नवंबर 2026। धनतेरस पर जहां राजधानी के बाजारों में रौनक है, वहीं शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं पर हड़ताल का असर गहराने लगा है। सफाई कर्मचारियों के आंदोलन ने अब नगर निगम के दूसरे विभागों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। लगातार दूसरे दिन घरों से कचरा नहीं उठा। अब पेयजल आपूर्ति पर भी संकट खड़ा हो गया है। जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों के काम बंद करने से कई इलाकों में पानी की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। ऐसे में त्योहार के बीच शहरवासियों की परेशानी बढ़ गई है। भोपाल में करीब 13 हजार नगर निगम कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इनमें सात हजार सफाईकर्मी और छह हजार अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, जलप्रदाय, अग्निशमन, भवन अनुज्ञा, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हैं। इसके चलते नगर निगम मुख्यालय अटल भवन के साथ ही सभी 85 वार्डों और 21 जोन में कामकाज प्रभावित हो रहा है।
400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी, रोज निकलता है 850 टन कचरा
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। घरों से कचरा उठाने के लिए लगाई गईं 400 से ज्यादा गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में ये गाड़ियां दो से तीन चक्कर लगाकर घरों से कचरा एकत्र करती हैं।शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर कचरा जमा होता है। यहां से कैप्सूल टैंकरों के जरिए इसे आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। भोपाल में प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। दो दिन से कलेक्शन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं। कई जगह डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़क पर फैल रहा है।
2.30 लाख नल कनेक्शन पर पेयजल संकट का खतरा
सफाई के बाद अब पानी की व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कर्मचारियों ने जलप्रदाय व्यवस्था में काम बंद करने की चेतावनी दी है। कुछ इलाकों में नल नहीं खुलने और टैंकरों से पानी का परिवहन बंद होने की जानकारी सामने आई है। इससे खासकर उन बस्तियों में परेशानी बढ़ सकती है, जहां लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं। ऐसे में जलप्रदाय विभाग के कर्मचारी काम पर नहीं लौटे तो बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।
25 हजार वेतन और अनुकंपा नियुक्ति की मांग
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, कर्मचारियों की प्रमुख मांग वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना है। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति और अन्य लंबित मांगों का निराकरण भी शामिल है। कर्मचारी नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग भी उठा रहे हैं। झांझोट का कहना है कि कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद ही हड़ताल को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा।
आयुक्त के साथ बैठक पर टिकी नजर
हड़ताल समाप्त कराने के लिए शुक्रवार को नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के साथ कर्मचारी नेताओं की बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों और यूनियन पदाधिकारियों के बीच भी बातचीत हुई है। नगर निगम आयुक्त ने बातचीत को सार्थक बताते हुए हड़ताल समाप्त होने की उम्मीद जताई है। हालांकि कर्मचारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय और मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग पर अड़े हुए हैं। गुरुवार को कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान नगर निगम मुख्यालय अटल भवन की बिजली आपूर्ति बंद कर ताला भी लगा दिया गया था। अब शुक्रवार की बातचीत से तय होगा कि धनतेरस और दीपावली के बीच शहर की सफाई और पेयजल व्यवस्था पटरी पर लौटेगी या लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।


