सिंधिया की अहमियत समझे कांग्रेस

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विजया पाठक

रायपुर। (इंडिया रिपोर्टर लाइव) प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान समय में प्रदेश की राजनीति से लूपलाईन में चल रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के नेता उनकी अहमियत और उपयोगिता को न समझकर बड़ी भूल कर रहे हैं। प्रदेश में हो रहे उपेक्षा से कहीं न कहीं सिंधिया अपने आप को ठगा सा भी महसूस कर रहे हैं। अभी हाल में उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल में जो बदलाव किया है वह उसका ही हिस्सा है। जिसमें सिंधिया ने अपने आप को कांग्रेस का नेता न बताकर समाजसेवक और क्रिकेटप्रेमी बताया है। निश्चित तौर पर पिछले समय से उनकी उपेक्षा हो रही है। इस तरह का बर्ताव कांग्रेस के लिए बहुत मंहगा पड़ेगा क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता आज के समय कम ही हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को आज प्रदेश में अहम पद देकर लाभ लेना चाहिए। उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद देकर कांग्रेस को मजबूत कराना चाहिए। यदि सिंधिया आज प्रदेशाध्यक्ष बनते हैं तो आने वाले समय कांग्रेस काफी मजबूत होगी। वहीं कमलनाथ सरकार को भी मजबूती प्रदान होगी। मध्यप्रदेश की राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसी शख्सियत का होना प्रदेश के लिए अच्छी बात है। अपने दो दशक के राजनीतिक कैरियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया की छबि निर्विवाद और स्वच्छ रही है। इतने बड़े राजघराने के होने के बावजूद उन्हें अहम और पद की लालसा नहीं रही। जिसका नमूना हमने 2018 के मध्यप्रदेश विधानसभा में देख लिया है। यह वह समय था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते तो प्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते थे। लेकिन हमेशा से कांग्रेस के एक कद्दावर और निष्ठावान नेता की तरह कार्य करते जा रहे हैं। उनकी निष्ठा पर कोई शक नहीं कर सकता है। सिंधिया आज भी ऐसी स्थिति में हैं कि किसी भी समय प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल मचा सकते हैं लेकिन वह ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे पार्टी की छबि खराब हो। यही कारण है कि सिंधिया की पार्टी हाईकमान में एक पहचान है, दबदबा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बेहद करीबियों में गिने जाते हैं। वे देश के धनाढ्यो व्यक्तियों में से एक हैं। सिंधिया से कांग्रेस के भविष्य की उम्मीदें हैं। कांग्रेस के युवा नेताओं की फेहरिस्त में शुमार ज्योतिरादित्य सिंधिया सियासी माहौल में पले-बढ़े हैं और राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। आज सिंधिया को कांग्रेस की जरूरत नहीं है बल्कि कांग्रेस को सिंधिया की जरूरत है। केंद्रीय नेता होने के बावजूद सिंधिया ने अपने प्रदेश को हमेशा सर्वोपरि माना है। वह चाहे विधानसभा के चुनाव का वक्त रहा हो या लोकसभा का रहा हो।

व्यवहार में संयमता और विचारों में शालीनता उनकी खासियत है। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने किसी के लिए कुछ गलत शब्दों का उपयोग नही किया और न ही कभी कुछ ऐसा बयान नहीं दिया जिससे बबाल मचा हो। सरलता, सौम्यता और शालीनता उनको विरासत में मिली है जिसका वह बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। यदि भविष्य में प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता के हाथ में प्रदेश की कमान आती है तो निश्चित तौर पर यह प्रदेश के हित में होगा।

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