विदेशी कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा क्यों नहीं?, दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों से पूछा

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दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों के सामने आने वाले मुद्दों के सिलसिले में जेल प्राधिकार से एक अधिकारी के उपस्थित होने के लिए कहा और पूछा कि विदेशी कैदियों को उनके परिवारों से बात करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा क्यों नहीं दी जाती।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राओं और दिल्ली दंगों की आरोपी नताशा नरवाल और देवांगना कालिता की जेल सुधार संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि विदेशी परिवारों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यों नहीं कराई जाती? आप फोन कॉल की इजाजत दे रहे हैं। आपको अपडेट होना पड़ेगा। जेल महानिदेशक की ओर से वकील गौतम नारायण ने कहा कि इस पहलू पर और अधिक सहायता तथा इस नीति के पीछे कारणों की सही से व्याख्या संबंधित अधिकारी ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारी को उपस्थित होने के लिए कहा जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि 10 सितंबर को सुनवाई की अगली तारीख पर मामले के जानकार अधिकारी प्रतिवादी की ओर से मौजूद रहें। नरवाल और कालिता की ओर से वकील अदित एस. पुजारी ने कहा कि मामले में उठाई गई अनेक शिकायतों पर अधिकारियों ने ध्यान दिया है, लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिन्हें देखना होगा।

हाईकोर्ट ने दिल्ली में अपराध दर में वृद्धि का संज्ञान लिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में अपराध के बढ़ते मामलों का शुक्रवार को संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार से कहा कि वह कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों और सजायाफ्ता कैदियों को दी गई अंतरिम जमानत बढ़ाने के आदेशों के प्रभाव पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। जस्टिस विपिन सांघी, जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच ने यह भी कहा कि वर्तमान में दिल्ली के किसी भी जेल परिसर में कोविड-19 का कोई मामला नहीं है और सरकार से इस पहलू पर एक रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है। बेंच ने कहा कि समाचार पत्रों की खबरें बताती हैं कि अपराध दर में वृद्धि हुई है। हमारे 20 अप्रैल, 2021 के आदेश के मद्देनजर अंतरिम आदेशों के विस्तार और अंतरिम जमानत के विस्तार के प्रभाव के संबंध में दिल्ली सरकार को एक रिपोर्ट दाखिल करने दें। अदालत ने सभी अंतरिम आदेशों को 27 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया, जो कि 16 जुलाई को समाप्त हो रहे हैं। अदालत मामले में आगे 27 जुलाई को सुनवाई करेगी। अदालत ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया जैसा कि उसने पिछले साल मार्च में किया था जब कोविड​​-19 के प्रकोप के मद्देनजर लॉकडाउन लागू किया गया था। 

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