‘जंग में आधुनिक बने रहने को रोज कुछ नया लाना होगा’; अंतरिक्ष-साइबर युद्ध नीति पर बोले सीडीएस चौहान

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

रांची 20 सितंबर 2025। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि अंतरिक्ष और साइबर युद्ध के लिए हथियारों के विकास के लिए नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने हथियार प्रणाली, प्लेटफॉर्म और नेटवर्क के स्वदेशी विकास पर जोर दिया। सीडीएस जनरल चौहान ने झारखंड के रांची में ईस्ट टेक सेमिनार में कहा कि हथियारों का रणनीतिक चयन सबसे महत्वपूर्ण है तथा आधुनिक जरूरतों के अनुसार अनुसंधान और विकास की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की आवश्यकता है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाना चाहिए। जनरल चौहान ने कहा कि भारत में रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण की शुरुआत भले ही देर से हुई हो, लेकिन देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने अनुसंधान और नवाचार में निवेश की आवश्यकता जोर दिया ताकि सशस्त्रबल आने वाली तकनीक से लैस रहें और देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सैनिकों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों में रचनात्मकता को बढ़ावा देने का आग्रह किया। हिंदी कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता का उल्लेख कर उन्होंने कहा कि यदि आप युद्ध में आधुनिक बने रहना चाहते हैं तो आपको कल्पनाशील होना होगा, आपको रोज कुछ नया और अभिनव लाना होगा। रामधारी सिंह का कथन केवल सैनिकों पर ही लागू नहीं होता, बल्कि वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों पर भी लागू होता है। एक सैनिक अपनी रणनीति में, एक वैज्ञानिक अपने हथियार डिजाइन में और एक उद्योगपति समय और लागत दक्षता में।

हथियार प्रणाली और नेटवर्क में भी विकसित करनी होगी आत्मनिर्भरता
उन्होंने कहा कि हमें न केवल प्लेटफॉर्म में बल्कि हथियार प्रणाली और नेटवर्क में भी आत्मनिर्भरता विकसित करनी होगी। हो सकता है कि हमने प्लेटफॉर्म के मामले में उतना अच्छा काम न किया हो लेकिन मुझे लगता है कि हमने हथियार प्रणाली के मामले में काफी अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि हमें अनुसंधान और विकास में निवेश करने की जरूरत है। तभी हम कल की तकनीक से आज के युद्ध जीत या लड़ पाएंगे।

पश्चिमी विचारों के गुलाम नहीं रह सकते
उन्होंने यह भी कहा कि हम युद्ध, युद्ध कौशन और युद्ध नीति के पश्चिमी विचारों के गुलाम नहीं रह सकते। युद्ध विज्ञान और कला दोनों है। आज के समय में एक योद्धा को रचनात्मक और अभिनव सोच वाला होना चाहिए। जब तक हम रचनात्मक नहीं होंगे, तब तक हम रक्षा क्षेत्र में नेतृत्व नहीं कर सकते।

हथियारों की नई श्रेणी हुई विकसित
सीडीएस ने कहा कि हथियार अब एक अलग श्रेणी में विकसित हो गए हैं जो कम कीमत में बहुत महंगे प्लेटफॉर्म को नष्ट करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, 50 करोड़ रुपये की मिसाइल 10,000 करोड़ रुपये का जहाज या विमान नष्ट कर सकती है। उन्होंने कहा कि नवाचार की रक्षा के लिए और युवा आविष्कारकों तथा रक्षा नवाचारकों को प्रोत्साहित करने के लिए एक मजबूत बौद्धिक संपदा प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने घोषणा की कि लंबे समय से प्रतीक्षित रक्षा खरीद मैनुअल (डीपीएम) 2025 को मंजूरी मिल गई है और इसे जल्द ही जारी कर दिया जाएगा, जो पुराने 2009 संस्करण की जगह लेगा।

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