छपार मेले से ‘आप’ की दूरी पर सियासी घमासान

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

हलवारा, 21 सितंबर 2026। चुनावी वर्ष में मालवा की राजनीतिक नब्ज टटोलने का प्रमुख मंच माने जाने वाले पारंपरिक छपार मेले को लेकर इस बार सियासी घमासान तेज हो गया है। 

सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) ने ऐतिहासिक मेले में अपनी राजनीतिक काॅन्फ्रेंस नहीं करने का फैसला लिया है। चुनावी साल में सत्ताधारी दल की इस पारंपरिक सियासी मंच से दूरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। विपक्ष इसे जमीनी असंतोष और जनता के रुख से जोड़ रहा है, जबकि आप इसे हाईकमान का नीतिगत फैसला बता रही है।

कांग्रेस के दाखा हलका प्रभारी कैप्टन संदीप सिंह संधू और रायकोट प्रभारी कामिल अमर सिंह बोपाराय ने आरोप लगाया कि आप को प्रदेश की जमीनी स्थिति और जनता के रुख का अंदाजा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि भीड़ न जुटने और जनता के आक्रोश से बचने के लिए पार्टी बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन से पीछे हट रही है।

शिरोमणि अकाली दल के दाखा प्रभारी जसकरण सिंह देओल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वारिस पंजाब दे के नेता मनप्रीत सिंह अयाली के बीच कथित बैठकों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए। देओल ने दावा किया कि अकाली दल की कांफ्रेंस को कमजोर करने के लिए आप और वारिस पंजाब दे के बीच अंदरूनी सांठगांठ हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 सितंबर की वारिस पंजाब दे की रैली को सफल बनाने के लिए सरकारी शह पर बसें, प्रलोभन और शराब बांटी जा रही है तथा इसमें आप समर्थकों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने पुलिस पर अकाली कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे नशा तस्करी के मुकदमे दर्ज कराने का भी आरोप लगाया।

जून 2026 में वारिस पंजाब दे में शामिल हुए स्थानीय विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और अकाली दल के प्रत्याशी जसकरण सिंह देओल के बीच दाखा में राजनीतिक वर्चस्व की सीधी लड़ाई मानी जा रही है। अयाली की ओर से 26 सितंबर को बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारियां की जा रही हैं।

वहीं भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा के बीच उसकी रणनीति पर भी नजर है। चर्चा है कि अकाली दल से संभावित भावी तालमेल को देखते हुए भाजपा सीधे मंच से दूरी बनाए हुए है और समर्थक पर्दे के पीछे अकाली एकत्रीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने कांफ्रेंस का एलान किया है लेकिन गुटबाजी और संगठनात्मक खींचतान उसके सामने चुनौती है।

आप और अयाली ने आरोप नकारे
पनग्रेन अध्यक्ष और आप नेता डॉ. तेजपाल सिंह गिल ने कहा कि छपार मेले में रैली न करने का फैसला हाईकमान का नीतिगत निर्णय है, क्योंकि इसी महीने पार्टी के कई अन्य बड़े आयोजन हैं। उन्होंने देओल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में अकाली दल की हार तय है और वारिस पंजाब दे महज वोट काटने का काम करेगी। अयाली ने भी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि रैली करना किसी भी संगठन का अपना फैसला है। छपार मेले में मालवा की जनता सबका भ्रम दूर कर देगी। 

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