डिप्टी सीएम सामान्य प्रक्रिया बता कर निर्वाचन आयोग और भाजपा के षड्यंत्रों पर पर्देदारी कर रहे हैं

इंडिया रिपोर्टर लाइव
रायपुर, 06 अक्टूबर 2026। बिना सत्यापन के एसआईआर के नाम पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित किए जाने को लेकर प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का यह सबसे बड़ा लोकतांत्रिक घोटाला है, सरकार के यू-टर्न से लोकतंत्र के खिलाफ इस संगठित अपराध का पर्दाफाश हो गया है। भाजपा सरकार अपनी संभावित हार से डरकर चुनाव आयोग के तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर राज्य के 25 लाख वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को अनुपस्थित और शिफ्टेड बताया गया, 6 लाख से ज्यादा मृत बताये, बिना किसी भौतिक सत्यापन के, फिल्टर लगाकर गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों के वोट कटे गए, यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सीधी हत्या है।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा और प्रशासनिक अमला इसे ‘सत्यापन और शुद्धिकरण’ बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह योजनाबद्ध तरीके से कांग्रेस समर्थित और गरीब मतदाताओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया से बाहर करने का षड्यंत्र है। प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके षड्यंत्र को अंजाम दिया जा रहा है। भाजपा के नेता फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। बिलासपुर शहर के तीन बूथों में एक साथ 117 मतदाताओं के नाम काटे गए, कांग्रेस की आपत्ति पर भौतिक सत्यापन में वे सभी मतदाता सही पाए गए, हमारे संघर्ष के बाद उनको मतदान का अधिकार मिला, ऐसी शिकायतें पूरे प्रदेश में है, रायपुर, बिरगांव, बालोद, दुर्ग और बस्तर में जबरिया विलोपन के हजारों शिकायतें हैं। मृतक, अनुपस्थित और शिफ्टेड के नाम पर बिना घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किए, सिर्फ कंप्यूटर एल्गोरिदम और फिल्टर लगाकर सामूहिक नाम काटे गए हैं। फॉर्म-7 (नाम हटाने का आवेदन) का सत्ता के दबाव में मनमाना इस्तेमाल किया गया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा जनसमर्थन खो चुकी है, इसलिए वह चुनाव मैदान में लड़ने के बजाय ‘वोटर लिस्ट’ से खेलकर चुनाव जीतना चाहती है। यह चुनाव आयोग के कंधों पर बंदूक रखकर की गई वोट की डकैती है। इसमें सीधे तौर पर ग्रामीण गरीब, मजदूर, आदिवासी, और ऐसे युवा प्रभावित हुए हैं जो आजीविका के लिए अस्थायी रूप से बाहर जाते हैं, उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला है।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है यदि यह रूटीन प्रक्रिया है, तो नाम काटने से पहले संबंधित मतदाता को लिखित नोटिस क्यों नहीं दिया गया? अब यह सरकार कह रही है कि 2003 के मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य नहीं है तो उसी आधार पर पहले नाम क्यों काटे गये? क्या 25 लाख लोगों की सूची सार्वजनिक कर बूथवार जांच कराने की हिम्मत भाजपा सरकार में है? कांग्रेस मांग करती है कि बीएलओ उन सभी 25 लाख मतदाताओं के पते पर जाएं, मौका मुआयना कर पंचनामा तैयार करें और स्थानीय निकाय की सामान्य सभा में अनुमोदन और सत्यापन के बाद ही विलोपन की कार्यवाही हो।


