पंजाब कांग्रेस का पंगा जारी, कैबिनेट शपथग्रहण से पहले राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ 6 विधायकों ने लिखी नवजोत सिंह सिद्धू को चिट्ठी

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

जालंधर 26 सितम्बर 2021। पंजाब कांग्रेस की कलह सुलझने का नाम ही नहीं ले रही है। पहले सीएम चुनने और अब नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कैबिनेट को लेकर पार्टी के अंदर ही विरोधी सुर उठने लगे हैं। चन्नी मंत्रीपरिषद के शपथग्रहण में कुछ ही घंटे बाकी हैं और अब दाओबा क्षेत्र के छह विधायकों और पूर्व मंत्री मोहिंदर सिंह केपी ने प्रदेश पार्टी चीफ नवजोत सिंह सिद्धू को चिट्ठी लिखकर राणा गुरजीत सिंह को प्रस्तावित कैबिनेट से हटाए जाने की मांग की है। इन सभी नेताओं का कहना है कि राणा गुरजीत सिंह दाओबा क्षेत्र के एक भ्रष्ट नेता हैं और इसलिए उनकी जगह किसी साफ छवि वाले दलित नेता को कैबिनेट में क्षेत्र का नुमाइंदा चुना जाना चाहिए। राणा गुरजीत सिंह कपूरथला से विधायक हैं। 

चिट्ठी लिखने वाले छह विधायकों में सुल्तानपुर लोढी के नवतेज सिंह चीमा, भोलथ के सुखपाल सिंह खैरा, फगवाड़ा के बलविंदर सिंह धालीवाल, जालंधन (नॉर्थ) के बावा हेनरी और शाम चौरासी के पवन अदीया शामिल हैं। एक विधायक ने पहचान न बताने की शर्त पर जानकारी दी कि सभी असंतुष्ट विधायक रविवार दोपहर पटियाला में नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाकात करेंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री की नई कैबिनेट का शपथग्रहण रविवार शाम चंडीगढ़ में है।

साल 2018 में राणा गुरजीत सिंह, जिनके पास बिजली और सिंचाई विभाग था, को रेत खदान की नीलामी के बाद छिड़े विवाद की वजह से कैबिनेट से हटा दिया गया था। चिट्ठी में विधायकों ने कहा है कि सा 2018 के घोटाले में राणा गुरजीत सिंह, उनके परिवार और उनकी कंपनियों के सीधे तौर पर शामिल होने के वजह से उन्हें कैबिनेट से हटाया गया था। चिट्ठी में यह भी बताया गया है कि पंजाब सरकार ने उनकी कंपनी राजबीर एंटरप्राइज की तरफ से पंजाब की तीन माइनिंग साइटों की नीलामी के लिए जमा किए करीब 25 करोड़ रुपये भी जब्त किए थे। जस्टिस नारंग कमिशन ने भी इस नीलामी में घोटाले का पर्दाफाश किया था।

विधायकों ने यह भी कहा कि राणा गुरजीत सिंह पर आरोप होने और किसी भी कोर्ट से क्लीनचिट न मिलने के बावजूद उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाना हैरानी भरा है। विधायकों ने यह भी कहा है कि दाओबा क्षेत्र से प्रस्तावित कैबिनेट मंत्री या तो जट सिख हैं या फिर ओबीसी सिख, जबकि यहां करीब 38 फीसदी दलित आबादी है। इसलिए राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट विस्तार में जगह न देकर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उनकी जगह किसी दलित चेहरे को शामिल किया जाए।

हालांकि, जब मोहिंदर सिंह केपी से हमारे सहयोगी हिन्दुस्तान टाइम्स ने संपर्क किया तो उन्होंने साफ कहा कि चिट्ठी पर उनके हस्ताक्षर नहीं है। केपी से जब राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट में शामिल किए जाने पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और वह कुछ नहीं कहना नहीं चाहते हैं। इस बीच, तीन विधायकों ने यह पुष्टि की है राणा गुरजीत को कैबिनेट में जगह न देने की मांग पर केपी ने भी अपना समर्थन दिया है।

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