मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिकाओं में एसआईआर को दी गई है चुनौती

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 27 मई 2026। सुप्रीम कोर्ट आज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुना सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस साल की शुरुआत में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत बुधवार को अपना फैसला सुनाएगी।

याचिका में उठाए गए हैं ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।

गरीब और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का दावा
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मतदान अधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

चुनाव आयोग क्यों मानता है एसआईआर को जरूरी?
अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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