200 से अधिक मौतें…करीब 60,000 लोग बेघर, लंबे संघर्ष के बाद सामान्य स्थिति में लौटा मणिपुर

Indiareporter Live
शेयर करे

इंडिया रिपोर्टर लाइव

इंफाल 26 दिसंबर 2023। कुकी और मेइती समुदायों के बीच भीषण जातीय संघर्षों के कारण मणिपुर इस साल अधिकतर समय सुर्खियों में बना रहा। इन संघर्षों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करीब 60,000 लोग बेघर हो गए। यूं तो हिंसा तीन मई को भड़की थी, लेकिन आरक्षित वन क्षेत्रों से अतिक्रमणकारियों को हटाने के राज्य सरकार के प्रयासों के कारण चुराचांदपुर और कांगपोकपी के पहाड़ी जिलों में तनाव फरवरी से ही पैदा हो गया था। राज्य सरकार ने फरवरी के अंत में आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण करने की वजह से चुराचांदपुर जिले में कुकी समुदाय के कुछ घरों को ध्वस्त कर दिया था, जिसकी कुकी-जो समुदाय के सदस्यों ने निंदा की थी। कांगपोकपी जिले में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच मार्च में उस समय झड़पें हो गईं जब प्रदर्शनकारियों ने ‘‘आरक्षित वनों, संरक्षित वनों और वन्यजीव अभयारण्य के नाम पर आदिवासी समुदाय की भूमि के अतिक्रमण” के खिलाफ एक रैली आयोजित करने की कोशिश की।

खेती को खत्म करने के लिए उठाए कदम
इसके बाद राज्य कैबिनेट ने दो कुकी-आधारित संगठनों – कुकी नेशनल आर्मी और जोमी रिवोल्यूशनरी आर्मी के साथ त्रिपक्षीय ‘संचालन निलंबन’ (एसओओ) वार्ता से यह कहते हुए हाथ खींच लिया कि ‘‘राज्य सरकार वन संसाधनों की रक्षा और अफीम की खेती को खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी।” एसओओ केंद्र, राज्य सरकार और कुकी उग्रवादी संगठनों के बीच 2008 से प्रभावी था। 

राज्य सरकार के इस समझौते से पीछे हटने के फैसले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और कुकी समुदायों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और खराब हो गए। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के खिलाफ विशेष रूप से चुराचांदपुर जिले में सार्वजनिक अशांति अप्रैल में हिंसक विरोध प्रदर्शन का कारण बनी। नवगठित चुराचांदपुर जिला स्थित ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम’ (आईटीएलएफ) ने ग्रामीणों को जंगलों से बेदखल करने के विरोध में 28 अप्रैल को आठ घंटे के बंद का आह्वान किया था। 

वाहन चालक के साथ हुई मारपीट
तनाव व्याप्त होने के बीच मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) ने तीन मई को पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया था। रैली नगा-बहुल पहाड़ी जिलों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई लेकिन चुराचांदपुर जिला मुख्यालय शहर में एक गैर-आदिवासी वाहन चालक के साथ मारपीट के बाद स्थिति ने खराब मोड़ ले लिया। 

चुराचांदपुर में 15,000 से अधिक प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक मैदान में एकत्र हुए थे। बाद में करीब 1,000 लोगों की भीड़ ने चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों के तोरबुंग और कांगवई के गैर-आदिवासी गांवों पर हमला किया। उसी रात तेंगनौपाल जिले के सीमावर्ती शहर मोरेह में भी आगजनी की ऐसी ही घटनाएं हुईं। राज्य सरकार ने ‘‘शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए” मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तुरंत निलंबित कर दिया और व्यापक हिंसा की तस्वीरों के कारण सांप्रदायिक तनाव पैदा होने के बीच पांच मई से ब्रॉडबैंड सेवाएं भी बंद कर दी गईं। 

Leave a Reply

Next Post

अभिनेता और DMDK के संस्थापक कैप्टन विजयकांत का निधन; पीएम मोदी-राहुल गांधी ने जताया दुख

शेयर करे इंडिया रिपोर्टर लाइव चेन्नई 28 दिसंबर 2023। तमिलनाडु में देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) के प्रमुख कैप्टन विजयकांत का गुरुवार को चेन्नई में निधन हो गया। वे हाल ही में कोरोना की चपेट में आ गए थे। अभिनेता और राजनेता की कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। पार्टी ने बयान जारी कर बताया […]

You May Like

रामपुर-नोनबिर्रा मार्ग पर भीषण हादसा....|....राशन लेने निकली 7 साल की मासूम बच्ची रहस्यमय ढंग से लापता....|....पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम साय ने शहीदों को किया नमन....|....BCCI प्रेसिडेंट बोले- रोहित-विराट का चयन उम्र देखकर नहीं....|....बावुमा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रचा कीर्तिमान....|....गोल्डन ग्लोब्स के नियमों से हारा पॉप म्यूजिक का स्टार....|....शिव भक्ति में डूबा दिखा रावण....|....यूरोप में विरोध की लहर: अल्बानिया में आठवें दिन भी झड़पें....|....रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा जापान का व्यापार घाटा....|....जोड़ों से लेकर रीढ़ की बीमारियों तक, मुंबई में मरीजों को मिलेगी विशेषज्ञ देखभाल