
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 22 फरवरी 2026। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था के खिलाफ है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं है कि ट्रंप अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से टैरिफ लागू करने के रास्ते तलाश रहे हैं। दरअसल, संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 को घोषित तथाकथित ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को निरस्त कर दिया था।
टैरिफ से भारत के निर्यात को नुकसान
चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या सरकार समर्थक टिप्पणीकार यह समझते हैं कि इन टैरिफ ने वैश्विक व्यापार को बुरी तरह बाधित किया और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली के खिलाफ काम किया। उन्होंने कहा कि इन कदमों से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। उनका कहना था कि सभी देशों ने ट्रंप के इस कदम को टैरिफ का हथियारकरण बताया था। अब अदालत के फैसले के बाद अन्य कानूनी प्रावधानों के जरिए टैरिफ लागू करने की कोशिश भी उसी नीति का हिस्सा है।
भारत-अमेरिका समझौते पर भी सवाल
हाल ही में ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बयान दिया था कि कुछ नहीं बदलता और भारत को टैरिफ देना होगा, जबकि अमेरिका को नहीं। इस पर चिदंबरम ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या यही वह पारस्परिकता है, जिसका वादा 2 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान में किया गया था? उन्होंने पूछा कि क्या यही वह उपलब्धि है, जिसका जश्न सरकार ने मनाया था?
15% तक बढ़े टैरिफ
ट्रंप ने शनिवार को सभी देशों पर टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की। इससे पहले, अदालत के फैसले के बाद उन्होंने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए भारत समेत सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का आदेश दिया था।


