नागालैंड पुलिस की अपील: भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्टों से बचें; राज्य में न फैलने दें मणिपुर हिंसा का असर

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

कोहिमा 20 मई 2026। पड़ोसी राज्य मणिपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और वहां भड़की जातीय हिंसा की चिंगारी नागालैंड तक पहुंचने की आशंका गहराने लगी है। इस नाजुक मोड़ पर नागालैंड पुलिस ने राज्य के नागरिकों से शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और अत्यधिक सतर्कता बरतने की पुरजोर अपील की है। नागालैंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रूपिन शर्मा ने जनता से बेहद जिम्मेदारी से व्यवहार करने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ कहा कि लोग किसी भी असत्यापित जानकारी, अफवाहों या भड़काऊ सोशल मीडिया सामग्री को आगे शेयर या फॉरवर्ड न करें। ऐसी हरकतें समाज में भय, गलतफहमी और सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकती हैं।

फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर कड़ा पहरा
शुक्रवार को जारी आधिकारिक अपील में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए झूठे और भ्रामक आख्यानों के प्रसार को लेकर गंभीर चेतावनी दी। पुलिस का कहना है कि आज के एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले दौर में फर्जी खबरें बनाना और उन्हें फैलाना पहले से कहीं ज्यादा आसान और खतरनाक हो चुका है। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सशस्त्र गुटों की ओर से बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के लिए व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञात हो कि कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सशस्त्र समूहों की ओर से बंधक बनाए गए कुकी और नागा समुदायों के लगभग 38 लोगों में से 31 को 14 और 15 मई को रिहा कर दिया गया था। इन लोगों को उस समय अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया था, जब 13 मई को कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने तीन चर्च नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी और चार अन्य को घायल कर दिया था। इसके अलावा नोनी जिले में भी एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और उसकी पत्नी घायल हुई थी।

कानून तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
नागालैंड पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे राज्य के बाहर हो रहे घटनाक्रमों पर भावुक होकर प्रतिक्रिया न दें। ऑनलाइन चल रही अफवाहों या भड़काऊ विमर्शों के बहकावे में आने से बचें। पुलिस प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। बयान में स्पष्ट किया गया है कि जो लोग जानबूझकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, अफवाहें या भड़काऊ सामग्री फैलाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। ऐसे उपद्रवियों पर भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत सख्त मुकदमा चलाया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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