
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 29 जून 2026। भारत ने विमानन सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बृहस्पतिवार को पहली बार जेट इंजन वाले विमान की सैटेलाइट आधारित लैंडिंग प्रणाली के जरिये सफल लैंडिंग करवाई। उदयपुर में इंडिगो के एयरबस ए320 विमान ने इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की ओर से विकसित गगन (जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन) प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए लैंडिंग प्रक्रिया पूरी की।
छोटे एयरपोर्ट पर बढ़ेगी सुरक्षा
कुछ वर्ष पहले टर्बोप्रॉप एटीआर विमान इस तकनीक का इस्तेमाल कर चुके हैं। अब जेट विमान भी इस प्रणाली से लैस हो गए हैं। सैटेलाइट आधारित लैंडिंग सिस्टम को उन छोटे हवाई अड्डों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है, जहां महंगे उपकरण लैंडिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं हैं।
चुनिंदा देशों की श्रेणी में भारत
इसरो और एएआई ने संयुक्त रूप से प्रणाली विकसित की है। यह हवाई क्षेत्र में एलपीवी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी कवरेज उपलब्ध कराती है। इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन प्रणाली है।
सैटेलाइट नेविगेशन की दिशा में बड़ी उपलब्धि
उदयपुर के लिए इंडिगो की उड़ान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसे भारत में सैटेलाइट आधारित नेविगेशन की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इंडिगो ने 2022 में अपने एटीआर बेड़े में एलपीवी संचालन शुरू किया था। अब कंपनी अपने सभी विमानों में सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम की सुविधा का विस्तार कर रही है।


