
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली, 06 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर (देखभाल करने वाला) रखने की अनुमति दे दी, जो 24 घंटे उनकी चिकित्सकीय जरूरतों का ध्यान रख सकेगा। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत मांगने वाली आसाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे फिलहाल लंबित रखा। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत और बिगड़ती है तो वे दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
सरकार ने पैरोल का मुद्दा उठाया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने यह तथ्य छिपाया है कि उनके वकील ने पहले पैरोल के लिए भी आवेदन किया था। इस पर आसाराम के वकील ने कहा कि पैरोल की अर्जी पहले दायर की गई थी और वह स्वास्थ्य कारणों के आधार पर नहीं थी।
AIIMS ने अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं बताई
सुप्रीम कोर्ट को पहले बताया गया था कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय सहायता और देखभाल की जरूरत है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने उन्हें प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी है। इससे पहले 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड बनाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया था।


