अमित जोगी का करोना वायरस को लेकर सरकार से तीन मुद्दों पर प्रकाश डालने का अनुरोध

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इंडिया रिपोर्टर लाइव 

रायपुर। 20 अप्रैल 2020। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने आज करोना वायरस को लेकर सरकार से तीन मुद्दों पर प्रकाश डालने का अनुरोध किया है। अमित जोगी ने कहा कि ये सियासी आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है और करोना महामारी के खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है किंतु छत्तीसगढ़ के एकमात्र क्षेत्रीय दल होने के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए इन मुद्दों पर हम प्रदेश हित में सरकार से उचित कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।

अमित जोगी ने कहा कि कोरोनावायरस एक महामारी बन गया है क्योंकि संक्रमित होने वाले अधिकांश लोग कोई लक्षण नहीं दिखाते हैं। इसी वजह से कोरोना-परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार संदिग्ध प्रकरण की 14 दिनों के दौरान कम से कम 3 बार (5+4+4) जाँच की जानी चाहिए और तीनों टेस्ट के नेगेटिव आने के बाद ही उसे कोरोना-मुक्त घोषित किया जा सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य नियंत्रण और कमांड सेंटर (Covid-19) द्वारा 18 अप्रैल 2020 तक जारी डेटा के मुताबिक, AIIMS रायपुर ने 36 में से 25 कोरोना मरीज़ों को औसतन 5 दिनों से भी कम समय में ही ठीक कर दिया जबकि प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ उनके उपचार के दौरान इनमें से केवल एक (पेशंट ज़ीरो) को दो दिनों तक वेंटिलेटर-सपोर्ट पर रखा गया था और सभी को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, एजिथ्रोमाइसिन इत्यादि की खुराक दी गई थी। अमित जोगी ने कहा कि हम स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। WHO, ICMR और MoHFW को इसका संज्ञान लेकर देखना चाहिए कि कहीं कोई चिकित्सकीय लापरवाही तो नहीं हुई है ।

अमित जोगी ने दूसरा प्रमुख मुद्दा करोना बचाव के लिए किए जा रहे छत्तीसगढ़ के सभी नगर निगमों में छिड़काव को उठाया और छत्तीसगढ़ शहरी विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे सैनिटाइजेशन अभियान को अपूर्ण बताया। सैनिटाइजेशन अभियान में छिड़काव के लिए WHO द्वारा 75-80%- स्पिरिट (एथनॉल), 1.45%- ग्लिसरोल, 0.125%- हाइड्रोजन परॉक्सायड और शेष डिस्टिल्ड या उबला पानी का घोल निर्धारित किया गया है किंतु अधिकांश निगमों द्वारा इसके विपरीत 50% से भी कम की स्पिरिट के घोल का छिड़काव किया जा रहा है जो कि अप्रभावी है। इस से संभवतः राज्य में ₹ 143 करोड़ का अपव्यय हुआ है।

अमित जोगी ने अपना तीसरा प्रमुख मुद्दा उठाते हुए बताया कि सरगुजा जैसे खनिज-सम्पन्न इलाक़ों को हॉटस्पॉट से बाहर रखने के लिए प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश संदिग्ध प्रकरणों, जिनमें 23 तबलीगी (सरगुजा के 11 और कोरबा के 12) भी शामिल हैं, की पर्याप्त जाँच नहीं की गई और 36 तबलीगियों को केवल 1 सैम्पल-रिपोर्ट के आधार पर 3 दिनों में ही नेगेटिव घोषित कर दिया गया जबकि निर्धारित टेस्टिंग मापदंडों के अनुसार 14 दिनों में कम से कम 3 सैम्पल-रिपोर्ट के बाद ही ऐसा किया जाना था। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ शक्तिशाली खनन-आधारित उद्योगपतियों के प्रभाव में ऐसा किया गया है ताकि उनके उद्योग लॉकडाउन में भी चलते रहे।

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