कानून मंत्रालय ने गिनाईं ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की खासियत, रिजिजू बोले- देश कांग्रेस को इसके खिलाफ…

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 17 दिसंबर 2024। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा के एजेंडे में कहा गया है कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 जिसे ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विधेयक के रूप में जाना जाता है, इसे केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल पेश करेंगे। इसे लेकर लगातार सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। इस बीच कानून और न्याय मंत्रालय ने बताया कि इस विधेयक की क्या कुछ खासियत है और इसे लाने से क्या फायदे होंगे। 

400 से अधिक बार हो चुके हैं चुनाव
कानून मंत्रालय का कहना है, भारत का लोकतंत्र चुनावी प्रक्रिया पर आधारित है, जो नागरिकों को सरकार के कामकाज में सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका देती है। स्वतंत्रता के बाद से, भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के 400 से अधिक चुनाव हो चुके हैं, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को दर्शाते हैं। हालांकि, चुनावों का बार-बार होना और इस पर विवाद खड़ा होना इस बात की ओर इशारा करता है कि एक और बेहतर चुनावी प्रणाली की जरूरत है। इसी वजह से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की विचारधारा फिर से चर्चाओं में आ गई। 

चुनावी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम
भारत में एक साथ चुनाव के विचार पर एक उच्च स्तरीय समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में इस विचारधारा को लागू करने के लिए एक विस्तृत योजना दी गई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को इन सिफारिशों को मंजूरी दी, जो चुनावी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस प्रणाली के समर्थकों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कामकाजी क्षमता बढ़ सकती है, चुनावों पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है और नीतियों में स्थिरता बढ़ सकती है। चूंकि भारत अपने शासन को बेहतर बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है, इसलिए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में सामने आया है, जिसके लिए गंभीर विचार-विमर्श और सबकी सहमति जरूरी है।

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