एससीओ बैठक के लिए चीन जाएंगे राजनाथ सिंह, 25 से 27 तक चलेगी; गलवां झड़प के बाद किसी मंत्री का पहला दौरा

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नई दिल्ली 21 जून 2025। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले सप्ताह 25 से 27 जून तक चीन के किंगदाओ शहर की यात्रा करेंगे। 2020 के गलवां संघर्ष के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की चीन की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। एससीओ की इस बैठक में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित 10 देशों के रक्षा मंत्री हिस्सा लेंगे। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोधी उपायों और कनेक्टिविटी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। राजनाथ सिंह इस बैठक के दौरान अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जुन और रूसी समकक्ष आंद्रेई बेलौसोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं। अक्तूबर 2024 में हुए भारत-चीन सीमा समझौते के बाद चीनी रक्षा मंत्री के साथ राजनाथ सिंह की पहली पहली मुलाकात होगी। उस समझौते के तहत पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए सैनिकों की वापसी और गश्त की बहाली पर सहमति बनी थी। इसके अलावा, राजनाथ सिंह कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों के रक्षा मंत्रियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के साथ कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी।

भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध में हो सकता है सुधार
भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत यह यात्रा भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अक्तूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने कई विश्वास-बहाली के उपाय शुरू किए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, नदियों के जल डेटा साझा करना, सीधी हवाई उड़ानों की बहाली और वीजा प्रक्रिया को आसान करना शामिल है।

क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर रहेगा विशेष ध्यान
अक्तूबर 2024 के समझौते के बाद दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं। राजनाथ सिंह ने इससे पहले लाओस में आयोजित 11वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) में नवंबर 2024 में एडमिरल डोंग जुन से मुलाकात की थी, जो सीमा समझौते के बाद उनकी पहली बातचीत थी।

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