
इंडिया रिपोर्टर लाइव
बंगलूरू 20 सितंबर 2025। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक में आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण 22 सितंबर से शुरू होगा और इसे टाला नहीं जाएगा। कुछ मंत्रियों के विरोध और टालने की मांग की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण पिछड़ा वर्ग आयोग ही करेगा और वही तय करेगा कि इसे कैसे किया जाए। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस सरकार हिंदू-विरोधी नहीं है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सिद्धारमैया ने कहा, ‘हम इसे नहीं टालेंगे। पिछड़ा वर्ग आयोग एक सांविधानिक निकाय है, हम उसे कोई निर्देश नहीं दे सकते। उन्होंने राय मांगी है, आगे वही फैसला करेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मंत्रियों के असंतोष की खबरें सच नहीं हैं और भाजपा इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा कांग्रेस सरकार को हिंदू-विरोधी बताने की कोशिश कर रही है। मैंने मंत्रियों से कहा है कि इसका जवाब दें और सच सामने रखें।
कैबिनेट बैठक में सर्वे पर नहीं लिया निर्णय
बृहस्पतिवार की कैबिनेट बैठक में सर्वे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में कुछ मंत्रियों ने वोक्कालिगा ईसाई, लिंगायत ईसाई, विश्वकर्मा ब्राह्मण ईसाई, गनीगा ईसाई और मदिवाला ईसाइयों को सूची में शामिल करने पर चिंता जताई।
उपमुख्यमंत्री की लोगों से अपील- सर्वे को लेकर घबराएं नहीं
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को लोगों से अपील की कि वे इस सर्वे को लेकर घबराएं नहीं। उन्होंने कहा, ‘ऐसा कुछ नहीं है। हम सब ठीक करेंगे। किसी को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। भाजपा और अन्य दल अफवाहें फैला रहे हैं। हमारी सरकार सबको न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम हर घर तक जाएंगे और कानून के दायरे में रहकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे।
वीआर सुदर्शन ने आयोग को दिए हैं सुझाव
यह पूछे जाने पर कि क्या कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष वीआर सुदर्शन ने कोई सिफारिश की थी। सवाल का जवाब देते हुए शिवकुमार ने कहा कि पिछड़ा वर्ग समुदाय के नेता के रूप में, उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर आयोग को सुझाव दिए हैं।
करंदलाजे ने मुख्यमंत्री पर बोला हमला
इस बीच, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने सर्वेक्षण को लेकर मुख्यमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जब भी सिद्धारमैया असफल होते हैं, तो वे जाति का हथियार निकालते हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि 2013 से 2018 के बीच भी सिद्धारमैया ने लिंगायत और वीर शैवों को बांटने की कोशिश की थी और अब फिर वे जातियों को तोड़ने में लगे हैं। वोक्कालिगा, लिंगायत और गनीगा समुदाय को बांटने के बाद अब वह ईसाई रूप सामने लाए हैं। यह साजिश है ताकि हमारा कोटा छीना जा सके।
अपनी जाति-उपजाति से ऊपर उठकर एकजुट हों सभी हिंदू: करंदलाजे
करंदलाजे ने कहा, ‘अगर कोई ईसाई है तो उसे उसी रूप में दर्ज करना चाहिए। जो एससी/एसटी या ओबीसी से ईसाई धर्म में गए हैं, उन्हें अल्पसंख्यक वर्ग की सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन अब सुनियोजित तरीके से एससी/एसटी और ओबीसी का आरक्षण छीना जा रहा है।’ उन्होंने आगे कहा कि समय आ गया है कि सभी हिंदू अपनी जाति और उपजाति से ऊपर उठकर एकजुट हों, वरना हम बंट जाएंगे। अंग्रेजों ने जो किया, वही मानसिकता इस सिद्धारमैया सरकार की भी है। हम इसे होने नहीं देंगे।


