
इंडिया रिपोर्टर लाइव
बिलासपुर 25 सितंबर 2025। आज की गड़बड़ लाइफस्टाइल और पोषण की कमी हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ आंखों की सेहत पर भी बुरा असर डाल रही है। लगातार मोबाइल, लैपटॉप की स्क्रीन देखने, टीवी के सामने घंटों बैठने और धूप की कमी से हमारी आंखें कमजोर हो रही हैं। पहले जहां 40-45 वर्ष की उम्र में नजर कमजोर होती थी, अब पांच साल से छोटे बच्चों को भी चश्मे की जरूरत पड़ रही है। पार्क में खेलते बच्चे हों या क्लासरूम में बैठे युवा, हर तीसरे-चौथे व्यक्ति की आंखों पर चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस नजर आता है। इस बढ़ती समस्या का कारण क्या है और क्या इससे बचा जा सकता है? वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
आंखों की रोशनी बढ़ाने वाला आई ड्रॉप
विशेषज्ञों ने एक ऐसा आई ड्रॉप विकसित किया है, जिसे दिन में कुछ बार इस्तेमाल करने से आपकी दृष्टि बेहतर हो सकती है और नजर के चश्मे की जरूरत कम हो सकती है। यह ड्रॉप विशेषकर प्रेसबायोपिया यानी उम्र बढ़ने पर नजदीक की चीजें ठीक से न दिखने की समस्या के लिए वरदान साबित हो सकता है। 766 मरीजों पर किए गए अध्ययन में, कुछ महीनों के उपयोग के बाद उनकी आंखों की रोशनी में सुधार देखा गया। बिना चश्मे के वे आसानी से आई टेस्ट के बोर्ड की तीन-चार लाइनें पढ़ने में सक्षम हो गए।
विशेषज्ञों की राय
डॉक्टर का कहना है कि नजर के चश्मे और सर्जरी के मौजूदा विकल्पों में कई बार असुविधा और जोखिम होते हैं। इस नए आई ड्रॉप ने मरीजों की दृष्टि में औसतन 3.45 जैगर लाइनों का सुधार किया है और इसका असर दो साल तक बना रहता है। यह आंखों की देखभाल के क्षेत्र में एक नई उम्मीद है।
बिना सर्जरी और बिना चश्मे के बेहतर देखना अब होगा आसान
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह ड्रॉप सर्जरी को पूरी तरह खत्म करने का विकल्प नहीं है, लेकिन उन लोगों के लिए प्रभावी है जो सुरक्षित और सरल उपाय चाहते हैं। यदि यह उपचार सभी उम्र और विभिन्न परिस्थितियों में सफल रहता है, तो यह नजर के चश्मे से छुटकारा पाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। आंखों की बढ़ती समस्या और नजर के चश्मे की बढ़ती जरूरत के बीच यह नया आई ड्रॉप एक उम्मीद की किरण साबित हो सकता है। आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें ।


