नौकरी लगवाने झांसा देने का आरोप, एफआईआर दर्ज

इंडिया रिपोर्टर लाइव
भोपाल, 28 सितंबर 2026। फर्जी आईएएस बनकर ठगी के आरोपों में घिरी तृप्ति सिंह के मामले में पुलिस जांच के दौरान नया मोड़ सामने आया है। जिस रोहित लिल्हारे ने तृप्ति के खिलाफ सबसे पहले शिकायत दर्ज कराई थी, अब बागसेवनिया पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक रोहित ने तृप्ति के कहने पर एक युवती से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत में युवती को नौकरी लगने और जॉइनिंग से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भरोसा दिलाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार रोहित ने युवती से कहा था कि जॉइनिंग और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी और सिर्फ मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) से सत्यापन बाकी है। पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल की जांच के बाद रोहित की भूमिका को संदिग्ध माना और उसे मामले में आरोपी बनाया।
पुलिस ने दर्ज किए बयान
पुलिस ने रोहित के बयान दर्ज किए। अब जांच में उसके तृप्ति के साथ संपर्क, संबंधित युवती से हुई बातचीत और बैंक खातों में हुए लेन-देन को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि तृप्ति और रोहित के बीच किस तरह की बातचीत होती थी और नौकरी से जुड़े दावों में उसकी भूमिका क्या थी। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि तृप्ति ने विधानसभा परिसर में युवतियों के साथ बनाए गए कुछ वीडियो रोहित को भेजे थे। इन वीडियो के जरिए नौकरी लगवाने की बात कहे जाने की जानकारी भी पुलिस के सामने आई है।
40 लाख रुपये देने की बात भी जांच में
पुलिस के मुताबिक रोहित ने तृप्ति को करीब 40 लाख रुपये दिए थे। हालांकि इस रकम के लेन-देन और उसकी पूरी भूमिका की अभी जांच की जा रही है। खास बात यह है कि रोहित ही तृप्ति के खिलाफ पहला मामला दर्ज कराने वाला शिकायतकर्ता था। इस मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने सितंबर के पहले सप्ताह में तीनों को गिरफ्तार किया था। तृप्ति और अन्य आरोपियों के खिलाफ अशोकनगर कोतवाली में भी प्रकरण दर्ज है।
नौकरी के नाम पर डेढ़ लाख लेने का आरोप
मामले में ख्याति नाम की युवती ने तृप्ति पर खुद को पर्यटन विभाग की अतिरिक्त संचालक बताकर नौकरी दिलाने का भरोसा देने और इसके बदले डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप लगाया था। इसी मामले की जांच के दौरान सामने आए मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल ने पुलिस को रोहित की भूमिका तक पहुंचाया।
सीडीआर और बैंक रिकॉर्ड से जांच आगे बढ़ा रही पुलिस
पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल नंबर और बैंक खातों के लेन-देन के जरिए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किस-किस से संपर्क किया गया, किसने किससे बातचीत की और पैसों का लेन-देन किन खातों के माध्यम से हुआ। रोहित को आरोपी बनाए जाने के बाद मामले में आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही प्रत्येक आरोपी की भूमिका और पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट होगी।


