
इंडिया रिपोर्टर लाइव
रायपुर 08 नवंबर 2025। भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री और मधुर स्वर साधिका सुलक्षणना पंडित के निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी शोक की लहर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा की अमर स्वर साधिका बताया।
मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘संगीत और अभिनय की उनकी यात्रा की जड़ें छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की उस सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी थीं, जहां संगीत एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवनधारा है। उन्होंने बताया कि सुलक्षणा पंडित का जन्म रायगढ़ की पुरानी बस्ती रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में हुआ था और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय से प्राप्त की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुलक्षणा के पिता प्रताप नारायण पंडित, राजा चक्रधर सिंह के दरबार के प्रसिद्ध तबला वादक थे। संगीत उनके परिवार की परंपरा थी, जिसे सुलक्षणा जी ने अपने सुरों के माध्यम से नई पहचान दी और पूरे देश में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। साय ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि उनकी आवाज़ में सादगी थी, भाव था और इस मिट्टी की सुगंध थी। छत्तीसगढ़ उनकी इस अमर संगीत यात्रा को नमन करता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें।
सुलक्षणा पंडित ने वर्ष 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से बतौर अभिनेत्री बॉलीवुड में पदार्पण किया था। उन्हें 1976 में फिल्म ‘संकल्प’ के गीत ‘तू ही सागर तू ही किनारा’ के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने करियर में कई हिट गीत गाए और लोकप्रियता हासिल की। उनका आखिरी प्लेबैक सॉन्ग 1996 की फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में था, जिसे उनके भाइयों जतिन-ललित ने संगीतबद्ध किया था।
कहा जाता है कि सुलक्षणा पंडित ने बॉलीवुड अभिनेता संजीव कुमार से एकतरफा प्रेम किया था, और उनके विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था। संगीत, अभिनय और संवेदना से भरपूर सुलक्षणा पंडित का जीवन भारतीय सिनेमा की विरासत और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता — दोनों का प्रतीक रहा।


